आईएएसएसटी के ४७वें स्थापना दिवस का उत्सव

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उन्नत अध्ययन संस्थान (आईएएसएसटी) ने दिनभर के कार्यक्रम के साथ अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया है। आईएएसएसटी की कल्पना और प्रारंभिक वर्षों में इसे असम विज्ञान सोसाइटी ने संकल्पित एवं पोषित किया था तथा इसका उद्घाटन नोबेल पुरस्कार विजेता डोरोथी सी. हॉजकिन द्वारा 3 नवंबर 1979 को किया गया था। इसके बाद, यह असम का एक स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास संस्थान होने के कारण राज्य सरकार द्वारा समर्थित रहा, जब तक कि मार्च 2009 में इसे भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा अपने एक स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास संस्थान के रूप में अधिग्रहित नहीं कर लिया गया। इसका दृष्टिकोण भौतिक एवं जीवन विज्ञानों के सीमांत अनुसंधान क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय दृश्यता के साथ उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उभरना तथा समाज के विकास के लिए उन्नत वैज्ञानिक ज्ञान की दिशा में मानव संसाधन निर्माण करना है।

कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के ध्वजारोहण और दीप प्रज्वलन से हुई। आईएएसएसटी के निदेशक प्रो. अशीष कुमार मुखर्जी ने सभी सम्मानित अतिथियों और प्रतिष्ठित वक्ताओं का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने संस्थान के विकास में सहयोग देने तथा इसके दृष्टिकोण को साकार करने के लिए आईएएसएसटी परिवार को बधाई दी। उद्घाटन सत्र की शोभा असम के बोदोलैंड विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. बी. एल. अहुजा, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रख्यात प्रोफेसर (जूलॉजी) प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया, भट्टदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. धनपति डेका तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति से बढ़ी। दो लोकप्रिय वैज्ञानिक व्याख्यान—डॉ. डोरोथी हॉजकिन तथा डॉ. सी.वी. रमन पर—क्रमशः प्रो. लखोटिया और प्रो. अहुजा द्वारा दिए गए तथा आईएएसएसटी और असम के पटशाला स्थित भट्टदेव विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को मजबूत बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पिछले वर्ष पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले आईएएसएसटी के शोध छात्रों तथा विश्व के शीर्ष 2% सबसे अधिक उद्धृत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होने और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के फेलो चुने जाने पर आईएएसएसटी के संकाय सदस्यों को गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सम्मानित किया गया। आईएएसएसटी के इस यादगार दिन का समापन संस्थान के शोध छात्रों एवं कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ।

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